तथाकथित ‘बुद्धिजीवियों’ के लक्षण !

असल बुद्धिजीवी वो होता है जो साल भर में एक भी किताबें ना पढ़ता हो, लेकिन फेसबुक और ट्विटर पर अपनी डीपी उसी फोटो को बनाता है जिसके पीछे किताबों से भरा रैक हो।
सच्चा बुद्धिजीवी किसी भी बात का सीखा जवाब नही देता है, मसलन यूपी में अगर किसी के घर बेटा पैदा हो गया तो उसे बधाई देने के बजाय बुद्धिजीवी जी को इस बात पर चिंता जतानी होती है, कि हरियाणा में कन्या भ्रूण हत्या बहुत हो रहा है।
बुद्धिजीवी कभी मुस्कुराता नहीं है, कुछ लोगो का अनुमान है कि उन्हें बचपन में शायद किसी ने बता दिया था कि मुस्कुराने वाला व्यक्ति कभी बुद्धिजीवी नही बन सकता है, इसलिए वो नही मुस्कुराते।
बुद्धिजीवी लम्बी-लम्बी गाड़ियों में चलता है, और रेड लाइट पर भीख मांगने वाले बच्चों को देखकर (उन्हें बिना एक रुपये दिए) तब तक दुखित रहता है, जब तक वो फेसबुक-ट्विटर पर इसको लेकर कोई पोस्ट नही डाल देता।
बुद्धिजीवी दो घण्टे सावर के नीचे खड़े होकर नहाते हुए इस बात पर गहन चिंतन करता है कि ज्यादा से ज्यादा पानी कैसे बचाया जाए।
बुद्धिजीवी स्त्रीयों के सम्मान, उनके अधिकार के लिए टीवी न्यूज़ डिबेट से लेकर फेसबुक-ट्विटर पर खूब जोरदार और ओजस्वी बोलता है, पर अगर उनकी खुद की बीवी ने एक बार भी उनकी बात काट दी तो फिर वो उनको भी काट (डंडे से) देता है।

Comments

Popular posts from this blog

Krunal Pandya’s Cricket Theme Pre-Wedding Shoot Has Clean Bowled Us

15 Times Indian Politicians Said Something But Meant Something Else

Husband Illustrates Everyday Life With His Wife, Proves Love Is In The Little Things